हल चलाकर बेटे को बनाया था सिपाही, अर्थी को कंधा देते वक्त कांप गए पिता के पैर. एसपी की आंखों में आ गए आंसू

हल चलाकर बेटे को बनाया था सिपाही, अर्थी को कंधा देते वक्त कांप गए पिता के पैर. एसपी की आंखों में आ गए आंसू

उन्नाव। हल चलाकर जिस बेटे को वर्दी पहनाई, गुरुवार को उसकी अर्थी को कंधा देते वक्त पिता के पैर कांप गए। बेटे की मौत के साथ उसके सारे सपने चकनाचूर हो गए। 

खुद को बेटा बता पैर छुए और हर वक्त साथ खड़े रहने का वादा किया, जिसने भी इस दृश्य को देखा आंख नम हो गई।

पुलिस लाइन के बलिदान स्मारक स्थल पर गार्ड-ऑफ ऑनर देने के बाद पुलिस वाहन से शव को गांव के लिए रवाना किया गया। इस दौरान मौजूद एएसपी अखिलेश सिंह, सीओ सिटी सोनम सिंह समेत अन्य पुलिस अधिकारी व कर्मियों की आंखे भी नम रहीं।

 

यह है पूरा मामला

जनपद मुरादाबाद के झजलेट क्षेत्र के गांव छज्जूपुर देयम निवासी 28 वर्षीय विकास कुमार पांच भाई बहनों में तीसरे नंबर का था। शुरुआत से ही वह पुलिस विभाग में जाने के सपने देखता था।

खेती कर परिवार का गुजारा चलाने वाले पिता अमर सिंह ने उसकी इच्छा पूरी करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। हल चलाकर बेटे के सपनों को पूरा किया। वर्ष 2019 में बेटा विकास पुलिस में सिपाही पद पर भर्ती हो गया।

ट्रेनिंग के बाद वर्दी पहनकर पिता के सामने आया तो सीना चौड़ा हो गया। इसके बाद उसकी पहली तैनाती उन्नाव में हुई। कुछ दिन पुलिस लाइन में रहने के बाद उसकी पहली पोस्टिंग असोहा थाना की चौकी कालूखेड़ा में हुई थी।

24 जुलाई 2024 को उसे बारासगवर थाना भेज दिया गया। जहां से ऊंचगांव चौकी में तैनाती कर दी गई। बुधवार देर रात करीब 10 बजे वह थाना में डाक रिसीव करा कर चौकी लौट रहा था।

इस दौरान क्षेत्र के परौरी गांव के पास उसकी बाइक सामने से आ रही दूसरी बाइक से टकरा गई थी। हेलमेट न लगा होने व सिर में गंभीर चोट आने से सिपाही विकास कुमार की माैत हो गई थी।

 

बच्चे के जन्म से पहले सिपाही ने छोड़ी दुनिया

सिपाही विकास की मौत की खबर जैसे ही गांव पहुंची पत्नी गीतांजलि गश खाकर गिर गई। होश आया तो गर्भ में पल रहे शिशु की चिंता में बेहाल हो गई। बोली बच्चे का देखने से पहले पति छोड़कर चले गए।

विकास का एक अन्य बेटा छह वर्ष का जैनकून है। सास विमला देवी व ससुर अमर के अलावा अन्य परिजनों के साथ वह पोस्टमार्टम हाउस पहुंची। पति का शव देख चीख पड़ी।

वहीं मां विमला का कलेजा भी छलनी हो गया। पिता एक कोने में खड़े सिसकते रहे। छोटे भाई अमित ने बताया कि विकास ही परिवार का सहारा थे, जिसकी बदौलत वह अपनी पढ़ाई कर रहा था। उसके जाने से परिवार में अंधकार छा गया।

दूसरी बाइक सवार तीनों नाबालिग, एक की हालत गंभीर

सिपाही विकास की बाइक जिस दूसरी बाइक से टकराई, उसमें बारासगवर के परौरी गांव निवासी नाबालिग रौनक शुक्ला, अंश यादव व आयुष सिंह थे। सभी मांगलिक कार्यक्रम में शामिल होकर घर लौट रहे थे।

हादसे में तीनों घायल हैं। रौनक की हालत गंभीर होने पर उसे एलएलआर कानपुर रेफर किया गया है। वहीं, आयुष सिंह को भी परिजन इलाज के लिए कानपुर ले गए हैं। अंश का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है।