कौन था असली 'मटका किंग'? कराची से आया था रतन खत्री, बंबई में बनाया साम्राज्य, जेल में कटे 19 महीने
हाल ही विजय वर्मा की एक नई सीरीज आई 'मटका किंग', जो सट्टेबाजी के खेल, करोड़ों के दांव और पावर की कहानी दिखाती है। यह असली मटका किंग रतन खत्री की जिंदगी पर आधारित बताई गई। रतन खत्री कौन थे, जो मुंबई के 'मटका किंग' बनकर मशहूर हुए, जानिए पूरी कहानी:
हाल ही ओटीटी पर विजय वर्मा की नई सीरीज 'मटका किंग' रिलीज हुई, जो चर्चा में है और काफी पसंद भी की गई। सीरीज की कहानी असली मटका किंग पर आधारित है। इसमें सट्टेबाजी की खतरनाक दुनिया को दिखाया गया। इस सीरीज के बाद से ही हर किसी के मन में यह जानने की इच्छा पैदा हो गई कि आखिर असली मटका किंग कौन था , जिसे करोड़ों के सट्टे का बादशाह माना जाता था? इसका नाम था रतन खत्री, जो 'मटका किंग' के नाम से मशहूर हुआ। चलिए आपको इसी के बारे में बताते हैं:
कौन थे 'मटका किंग' रतन खत्री?
रतन खत्री की कहानी उस दौर की है, जब नंबरों में किस्मत सिमटी होती थी और एक सही चाल भी आदमी को बादशाह बना देती थी। रतन खत्री एक ऐसे शख्स था, जिसने भारत में सट्टेबाजी की शुरुआत की और फिर उसे नई ऊंचाइयों पर ले गया। उसे सट्टेबाजी का 'किंग पिन'और 'मटका किंग' कहा जाता था। रतन खत्री ने मटका को देश की सबसे मुनाफे वाली अंडरग्राउंड इंडस्ट्री में से एक बना दिया था। रमन खत्री शुरुआत में कोई बड़ी शख्सियत नहीं था। वह तो बल्कि प्रवासी था, जो सिंधु से ताल्लुक रखता था और विभाजन के बाद भारत आया था। लेकिन देखते ही देखते वह कब सट्टेबाजी के खेल का बादशाह बन गया, पता ही नहीं चला और फिर Matka King कहलाया।
कराची में पैदा, विभाजन के बाद आए भारत, सट्टेबाजी में बादशाहत
रतन खत्री कराची से सिंधी हिंदू परिवार में पैदा हुए और विभाजन के बाद परिवार के साथ भारत आ गए। यहां उन्होंने मुंबई (तब बंबई) में अपना डेरा जमाया। रतन जब किशोरावस्था में पहुंचे तो कपड़ा बाजारों और मिलों में काम करना शुरू कर दिया। वहीं उनका राब्ता सट्टेबाजी से बुआ। वह कपास के एक्सचेंज नंबर्स पर सट्टा लगाया जाता था। उसी दौरान मुंबई में सट्टेबाजी का एक नया रूप शुरू हुआ था, जिसे 'मटका' कहा जाता था। इससे रतन खत्री जुड़ गए और इसे सट्टे के एक बड़े नेटवर्क में बदल दिया।
कल्याणजी भगत के लिए काम, ऐसे बने 'मटका किंग'
इससे पहले रतन खत्री ने कच्छ के एक व्यापारी कल्याणजी भगत के लिए काम किया, जो वर्ली मटका के लिए जाने जाते थे। यह भी एक तरह का सट्टा ही था। इसमें न्यूयॉर्क कॉटन एक्सचेंज से ट्रांसमिट होने वाले कपास की कीमतों पर सट्टेबाजी की जाती थी। खत्री और उनके दोस्त भी कपास बाजार की कीमतों पर सट्टा लगाते थे। फिर रतन खत्री के दोस्तों ने उनसे कहा कि वह सट्टेबाजी का अपना खुद का अलग सिंडिकेट शुरू करें। इस तरह रतन खत्री ने अलग सिंडिकेट शुरू किया, जिसका नाम 'रतन मटका' या 'मेन बाजार मटका' रखा। देखते ही देखते यह घर-घर मशहूर हो गया।
रतन खत्री ने ऐसे आसान बनाया 'मटका', जुड़ीं कई हस्तियां भी
रतन खत्री ने मटका के गेम को इस कदर आसान बना दिया कि जो भी जुड़ता तारीफ करता। उन्होंने इसमें मिट्टी के बर्तन से ताश के पत्तों के 3 कार्ड निकालने की शुरुआत की। ऐसा करने से खेल में पारदर्शिता और विश्वसनीयता आई। इस तरह रतन खत्री धीरे-धीरे 'मटका किंग' बनकर मशहूर हो गए। देश और दुनिया की कई बड़ी हस्तियां उनकी क्लाइंट बन गईं। बेशक, कल्याणजी भगत ने देश में सबसे पहले मटका की शुरुआत की थी, पर इसे पूरे देशभर में फैलाने और एक मुनाफे वाली इंडस्ट्री का रूप देने में रतन खत्री का अहम रोल रहा।
इमरजेंसी में गए जेल, 19 महीने सलाखों के पीछे, 2020 में मौत
रतन खत्री का काम बहुत अच्छा चल रहा था, पर जब 1975 में भारत में इमरजेंसी लगी, तो रतन खत्री को जेल जाना पड़ा। बताया जाता है कि उन्हें करीब 19 महीनों तक जेल में रखा गया। फिर जब वह जेल से बाहर आए, तो सट्टेबाजी के नेटवर्क से दूरी बना ली और फिर 1990 में हमेशा के लिए इससे संन्यास ले लिया। साल 2020 में रतन खत्री का निधन हो गया।

