NATO Vs JEF: ट्रंप ने नाटो से निकलकर दिया धोखा तो यूरोप एक्टिव करेगा प्लान-बी, पुतिन को रोक पाएगा JEF? जानें
JEF: यूरोप में इस समय प्लान-बी और Joint Expeditionary Force (JEF) को लेकर बड़ी हलचल है। इसमें अमेरिका के नाटो से हटने के बाद एक बार फिर ब्रिटेन को की अगुवाई में दुश्मनों से मुकाबला करने की बात कही गई है।
लंदन: डोनाल्ड ट्रंप यूरोपीय देशों से अमेरिकी लड़ाकू विमान और पनडुब्बियों को वापस बुलाने वाले हैं। अगर वो ऐसा करते हैं तो इसे नाटो के अंत की शुरूआत माना जाएगा। इस बीच यूरोप के 10 नॉर्डिक और बाल्टिक देशों के रणनीतिक जानकारों के बीच एक मजबूत राय ब्रिटेन को लेकर बन रही है। उनका मानना है कि लंदन को अपनी परमाणु क्षमताओं, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अपनी स्थायी सीट, अपने खुफिया नेटवर्क और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी केंद्र के तौर पर अपनी स्थिति का लाभ उठाते हुए रूस के खिलाफ यूरोप का नेतृत्व करना चाहिए।
इस विचार को NATO के तौर पर पेश किया जा रहा है। इसका मतलब ये है कि अमेरिका शायद अब किसी एक नाटो देश पर हमले के बाद अनुच्छेद-5 यानि एक देश पर हमला मतलब सभी देशों पर हमला वाले सिद्धांत को मानने से मना कर दें। ऐसी स्थिति में नाटो देशों के बीच सामूहिक सुरक्षा के लिए अमेरिका की जगह ब्रिटेन को आगे आने के लिए कहा जा रहा है।
यूरोपीय देशों का प्लान-बी क्या है?
यूरोप में इस समय प्लान-बी और Joint Expeditionary Force (JEF) को लेकर बड़ी हलचल है। यूरोपीय देशों के प्लान-बी पर 2025 में फिनिश इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स (FIIA) के मत्ती पेसु और टॉमस वालेनियस ने मिलकर एक पेपर लिखा था। इसमें उन्होंने इस प्लान के पक्ष में तर्क दिए। ब्रिटेन की साप्ताहिक पत्रिका 'द इकोनॉमिस्ट' में इनके प्लान का जोरदार समर्थन किया गया है।
ये दोनों फिनिश विद्वान तर्क देते हैं कि रूसी खतरों का मुकाबला करने के लिए फिनलैंड स्वीडन, नॉर्वे, यूनाइटेड किंगडम और शायद, फ्रांस की ओर रुख करेगा। लॉजिस्टिक्स के लिहाज से युद्ध की स्थिति में फिनलैंड को आपूर्ति करने में स्कैंडिनेवियाई देश अहम भूमिका निभाते हैं और फिनलैंड नॉर्डिक कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे में बड़े सुधारों की वकालत करता रहा है। इसके अलावा ये देश संभावित रूप से काफी सैन्य क्षमताएं भी प्रदान कर सकते
क्या है Joint Expeditionary Force (JEF)?
- JEF कोई नई सेना नहीं है बल्कि 10 उत्तरी यूरोपीय देशों का एक मजबूत सैन्य गठबंधन है जिसका नेतृत्व यूनाइटेड किंगडम करे ऐसी थ्योरी दी गई है।
- इसमें UK के अलावा डेनमार्क, एस्टोनिया, फिनलैंड, आइसलैंड, लातविया, लिथुआनिया, नीदरलैंड, नॉर्वे और स्वीडन शामिल हैं।
- नाटो में कोई भी सैन्य कार्रवाई करने के लिए सभी 32 सदस्य देशों की सहमति जरूरी होती है जिसमें बहुत समय लग जाता है। इसके विपरीत JEF में आम सहमति की जरूरत नहीं होती। अगर सिर्फ दो देश भी चाहें तो वे तुरंत सेना तैनात कर सकते हैं।
- इसका कमान केंद्र लंदन (लॉजिस्टिक्स और इंटेलिजेंस नेटवर्क के साथ) में स्थित है जो नाटो के संचार माध्यमों पर निर्भर नहीं है।
इन देशों के पास सामूहिक रूप से 200 से ज्यादा आधुनिक लड़ाकू विमानों वाली वायु सेना है और नॉर्वे और स्वीडन जैसे समृद्ध देशों से सेना के लिए ज्यादा वित्तीय संसाधनों की उम्मीद की गई गै। पेसु और वालेनियस फिर यूनाइटेड किंगडम को उत्तरी यूरोपीय सुरक्षा में वास्तविक रुचि रखने वाले एक गंभीर सुरक्षा प्रदाता के रूप में देखते हैं। उनके अनुसार लंदन संभावित रूप से जमीन, समुद्र और हवा में सैन्य सहायता की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदान कर सकता है साथ ही खुफिया जानकारी, टोही और निगरानी जैसी विशेष क्षमताएं भी उपलब्ध करा सकता है।
अमेरिका के नाटो से बाहर जाते ही JEF होगा एक्टिव!
इसका मकसद भी सीधे तौर पर रूस का मुकाबला करना होगा। उत्तरी समुद्री सीमाओं और बाल्टिक क्षेत्र में रूस की पनडुब्बियों और 'शैडो फ्लीट' की आक्रामकता 30% तक बढ़ गई है। नाटो की सुस्त रफ्तार को देखते हुए ब्रिटेन ने JEF देशों के साथ मिलकर एक एकीकृत नौसैनिक बल बनाने का समझौता किया है। JEF देश पहले से ही नॉर्डिक वार्डन जैसे ऑपरेशनों के जरिए समुद्र के नीचे मौजूद जरूरी केबलों और पाइपलाइनों की सुरक्षा के लिए एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं। यानि बहुत आसान भाषा में समझें तो अब यूरोप अमेरिका के भरोसे हाथ पर हाथ धरकर नहीं बैठना चाहता। यदि अमेरिका नाटो से पैर पीछे खींचता है तो UK के नेतृत्व में JEF और यूरोपीय देश रूस के खिलाफ मोर्चा संभालने के लिए अपनी खुद की 'लड़ाकू फ्लीट' और सुरक्षा चक्र तैयार कर चुके हैं।

