इंडोनेशिया संग मिलकर अमेरिका ने अब पकड़ी चीन की गर्दन, मलक्का स्ट्रेट में ट्रंप ने कर दी ड्रैगन की घेराबंदी? जानें

Strait of Malacca: ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को ब्लॉक कर समुद्री रास्तों को हथियार बना दिया है। एक सदी से भी पहले अल्फ्रेड थेयर महान ने यह तर्क दिया था कि समुद्री शक्ति, नौसेना के बेड़े, समुद्री मार्ग के संकरे नाके और समुद्री व्यापार ही दुनिया की महान शक्तियों का भविष्य तय करेंगे।

इंडोनेशिया संग मिलकर अमेरिका ने अब पकड़ी चीन की गर्दन, मलक्का स्ट्रेट में ट्रंप ने कर दी ड्रैगन की घेराबंदी? जानें

वॉशिंगटन/जकार्ता: अमेरिका और इंडोनेशिया एक बीच एक रक्षा सौदा होने वाला है जिसका सीधा निशाना चीन होगा। इंडोनेशिया, अमेरिका को अपने एयरस्पेस इस्तेमाल करने की इजाजत दे सकता है। अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन में रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच बैठक हुई है। ये रक्षा सौदा सीधे तौर पर चीन के मलक्का स्ट्रेट टेंशन से जुड़ी है। मलक्का स्ट्रेट मलय प्रायद्वीप यानि मलेशिया और इंडोनेशियाई द्वीप सुमात्रा के बीच स्थित है। यह हिंद महासागर (अंडमान सागर) को प्रशांत महासागर (दक्षिण चीन सागर) से जोड़ता है। इसकी लंबाई लगभग 900 किलोमीटर है लेकिन इसकी चौड़ाई कुछ जगहों पर 3 किलोमीटर से भी कम है।

चीन के पूर्व राष्ट्रपति हू जिंताओ ने बीस साल पहले चीन को इसके बारे में चेतावनी दी थी। 2003 में तत्कालीन चीनी राष्ट्रपति ने 'मलक्का दुविधा' नाम दिया था। उन्होंने कहा था कि दूसरी ताकतें मलक्का को ब्लॉक कर चीन की इकोनॉमी को ठप कर सकती हैं। उनका इशारा भारत और अमेरिका को लेकर था। चीन अपना तेल का ज्यादातर हिस्सा और गैस आज भी मलक्का के रास्ते से ही मंगवाता है। इसीलिए डोनाल्ड ट्रंप अगर इंडोनेशिया के एयरस्पेस को लेकर समझौता  कर रहे हैं तो ये कोई इत्तेफाक नहीं है

मलक्का से चीन की कैसे घेराबंदी कर रहा अमेरिका?

अमेरिका के डिफेंस एक्सपर्ट जेम्स थ्रोन ने लिखा है कि अमेरिका ने इंडोनेशिया के साथ अपने रक्षा संबंधों को हमेशा से 'प्रमुख रक्षा साझेदारी' की तरह कूटनीतिक शब्दों में पेश किया है। लेकिन गहराई से देखने पर पता चलता है कि अमेरिका का मकसद कुछ और है। इसका मकसद इंडोनेशिया को और उसके जरिए अमेरिका और उसके सहयोगियों को हिंद महासागर और दक्षिण चीन सागर के बीच होने वाली हर हलचल की कहीं ज़्यादा विस्तृत और स्पष्ट तस्वीर उपलब्ध कराना है। संकट के समय अमेरिका मलक्का को पूरी तरह से ब्लॉक कर चीन को घुटने पर ला सकता है। ये अमेरिका की खुद को फिर से नौसैनिक शक्ति स्थापित करने की कोशिश है।

खाड़ी देशों और अफ्रीका से आने वाला तेल समुद्री रास्ते से ही चीन तक पहुंचता है। इसका सबसे छोटा और सबसे सस्ता रास्ता भारत के पास से होकर मलक्का और इंडोनेशिया के आस-पास के जलडमरूमध्यों से गुजरता है और फिर ये रास्ता उन क्षेत्रों से होकर गुजरता है जहां अमेरिकी नौसेना वर्षों से अपने सहयोगियों के साथ मौजूद है। यहां से यूएस नेवी चीन जाने वाले जहाजों पर नजर रखती है। ऐसा कर चीन पर एक अदृश्य दबाव बनाया जाता है जिसका उपाय वो आज तक नहीं तलाश पाया है।



समुद्री चोकप्वाइंट्स कैसे बने हथियार?

ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को ब्लॉक कर समुद्री रास्तों को हथियार बना दिया है। एक सदी से भी पहले अल्फ्रेड थेयर महान ने यह तर्क दिया था कि समुद्री शक्ति, नौसेना के बेड़े, समुद्री मार्ग के संकरे नाके और समुद्री व्यापार ही दुनिया की महान शक्तियों का भविष्य तय करेंगे। ट्रंप का इंडोनेशिया वाला कदम पूरी तरह से उसी सिद्धांत पर आधारित है। जमीन पर अपना दबदबा बनाने की कोशिश करने के बजाय वॉशिंगटन उन समुद्री मार्गों और जलडमरूमध्यों पर अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है जिनके रास्ते चीन की आर्थिक जीवनरेखा बहती है।

बीजिंग ने पिछले दो दशकों में इस जाल से निकलने की बहुत कोशिश की है। इसके लिए उसने मध्य एशिया और रूस से पाइपलाइनें बिछाईं, म्यांमार के रास्ते एक गलियारा बनाया और ग्वादर से लेकर जिबूती तक बंदरगाहों की एक 'स्ट्रिंग ऑफ पर्स्ल' तैयार की। फिर भी वो मलक्का की दुविधा से पार नहीं पाया। तेल और गैस के निर्यात के लिए जमीनी रास्ते बहुत कम इस्तेमाल होते हैं और ये काफी ज्यादा महंगा भी होता है। चीन की ज्यादातर ऊर्जा आज भी टैंकरों के जरिए आती है और दक्षिण-पूर्व एशिया के समुद्री रास्तों से ही गुजरती है। यही वजह है कि इंडोनेशिया इतना ज्यादा अहम है। ये राष्ट्रपति ट्रंप का एक और दांव है जिससे चीन निश्चित तौर पर परेशान होगा।