मानव सेवा ही माधव सेवा: अधिवक्ता अमर विवेक की अनोखी जीवन यात्रा
न्याय, गाँव सेवा और 175 बार रक्तदान का अद्भुत संकल्प
चंडीगढ़।
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में चार दशकों से अधिक समय से वकालत कर रहे अधिवक्ता अमर विवेक ने यह सिद्ध किया है कि एक वकील का जीवन केवल केस और अदालत तक सीमित नहीं होना चाहिए। उन्होंने “मानव सेवा ही माधव सेवा” के सिद्धांत को जीते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य, रक्तदान और युवा सशक्तिकरण को अपनी जीवन साधना बना लिया है।
शिक्षा और गाँव सेवा का संकल्प
12 सितम्बर 1990 को स्थापित श्री सत्य साईं ग्रामीण जागृति ट्रस्ट के माध्यम से गाँव दरवा (यमुनानगर) में निःशुल्क आधुनिक विद्यालय की स्थापना की गई। यह विद्यालय इतना प्रेरणादायक बना कि तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने इसे 2007 में अपने विदाई भाषण और इंडिया टुडे साक्षात्कार में विशेष रूप से उल्लेख किया।
रक्तदान: जीवन का जैविक संकल्प
30 जुलाई 1981 से अब तक 175 बार रक्तदान कर चुके अमर विवेक कहते हैं—
“हर 90 दिन बाद रक्तदान से मेरे शरीर में नई ऊर्जा आती है। रक्तदान ने मुझे स्वास्थ्य दिया है, और सेवा ने जीवन का उद्देश्य।”
स्वास्थ्य सेवा के मंदिर
अपने पिता स्व. संतोष कुमार अग्रवाल (अधिवक्ता एवं समाजसेवी) की प्रेरणा से अमर विवेक ने 1 जुलाई 2024 को श्री सत्य साईं मानव सेवा निःशुल्क अस्पताल, कुरारी (मोहाली) की स्थापना की। कुछ ही महीनों में यहाँ हजारों रोगियों का निःशुल्क इलाज, दवाइयाँ, जाँच और 325 नि:शुल्क नेत्र-ऑपरेशन हो चुके हैं।
कोविड-19 संकट में उन्होंने दो निःशुल्क 50-बेड कोविड अस्पताल भी शुरू किए, जो अनेक ज़िंदगियों के लिए संजीवनी बने।
युवाओं को नई दिशा
अमर विवेक, सुरे ट्रस्ट के सह-ट्रस्टी के रूप में, ग्रामीण इंजीनियरिंग स्नातकों को 40 से अधिक कोर्सों में निःशुल्क प्रशिक्षण दे रहे हैं। साथ ही, वे शहीद भगत सिंह के पैतृक गाँव खटकड़ कलां (नवांशहर) में एक अत्याधुनिक स्किल डिवेलपमेंट सेंटर स्थापित कर रहे हैं, जिसका शुभारंभ 23 नवम्बर 2025 को श्री सत्य साईं बाबा की 100वीं जयंती पर प्रस्तावित है।
न्याय भी सेवा का साधन
वकालत को केवल पेशा न मानकर उन्होंने अनेक निःशुल्क केस और जनहित याचिकाएँ (PILs) लड़ी हैं। हाल ही में उनके प्रयासों से एक मज़दूर को बिल्कुल नि:शुल्क हार्ट वाल्व बैटरी रिप्लेसमेंट उपलब्ध कराया गया।
पुरस्कार और प्रेरणा
1985 में उन्हें राष्ट्रीय युवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जो 12 जनवरी 1987 को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने प्रदान किया। लेकिन वे मानते हैं कि असली पुरस्कार केवल सेवा करने का अवसर है।
अंतिम सपना
उनका सपना है कि भविष्य में एक 1000-बेड का अत्याधुनिक निःशुल्क अस्पताल बनाया जाए, जहाँ किसी गरीब को पैसे के अभाव में इलाज से वंचित न होना पड़े।
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“जीवन वही सार्थक है, जो दूसरों के काम आए। मानव सेवा ही सच्ची ईश्वर सेवा है।” – अमर विवेक

