Karwa Chauth 2025 Mitti Ka Karwa: करवाचौथ पर मिट्टी का करवा क्यों है जरूरी, जानें महत्व और पूजा के बाद करवे का क्या करें

Karwa Chauth 2025 Mitti Ka Karwa: करवाचौथ पर मिट्टी का करवा क्यों है जरूरी, जानें महत्व और पूजा के बाद करवे का क्या करें

Mitti Ke Karwa Ka Kya Mahatva Hai: करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास की चतुर्थी तिथि पर सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु के लिए रखती हैं। इस व्रत में मिट्टी के करवे का विशेष महत्व है, जिसमें पंच तत्व समाहित होते हैं। मिट्टी का करवा पति-पत्नी के नाजुक रिश्ते का प्रतीक है। मिट्टी के करवे में मौजूद पंचतत्व का समन्वय जीवन में खुशियों के लिए जरूरी होता है।

 

Karwa Chauth Clay Pots Importance: करवाचौथ का व्रत हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर रखा जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करके पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य की कामना करते हुए निर्जला व्रत रखती हैं। Karwa Choth के दिन शिवजी, मां पार्वती और गणेशजी की पूजा की जाती है। मान्यता है कि पूरे विधि-विधान से करवा चौथ का व्रत रखने से करवा माता प्रसन्न होती हैं और महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। वहीं, इसमें मिट्टी का करवा यानी घड़ा/बर्तन प्रयोग करने का विशेष महत्व होता है। इसके बिना व्रती की पूजा अधूरी रह सकती है। ऐसे में आइए जानें करवाचौथ पर मिट्टी के करवे का महत्व...


करवा चौथ पर मिट्टी के करवे का महत्व

Karwachouthपर सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं और चांद के दर्शन करने के बाद व्रत का पारण करती हैं। इस दौरान पति अपनी पत्नी को मिट्टी के करवे से पानी पिलाकर व्रत खुलवाते हैं। बता दें कि करवा शब्द का मतलब मिट्टी का घड़ा/बर्तन होता है। वहीं, चौथ को चतुर्थी कहा जाता है। मिट्टी के करवा में जल, हवा, मिट्टी, अग्नि और आकाश पांच तत्व मौजूद होते हैं। इन्हीं तत्वों के द्वारा इसका निर्माण भी किया जाता है। ऐसे में मिट्टी के करवे से पानी पिलाकर पति और पत्नी अपने रिश्ते में पंच तत्वों और परमात्मा को साक्षी बनाते हैं।

 

मिट्टी के करवे में होते हैं पंचतत्व

मिट्टी के करवा बनाने के लिए मिट्टी को गलाया जाता है। ऐसे में यह भूमि और जल तत्व का प्रतीक है। इसके बाद, बर्तन को धूप और हवा में सुखाया जाता है, जो आकाश व वायु का प्रतीक होता है। सुखाने के बाद मिट्टी के करवे को अग्नि में तपाकर पूरी तरह तैयार किया जाता है जिसे, अग्नि तत्व का प्रतीक माना जाता है। इन पांच तत्वों के समन्वय से जीवन में खुशियां आने लगती हैं। साथ ही, मिट्टी के बर्तन में पानी पीना आयुर्वेद में भी बहुत लाभकारी बताया जाता है।

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