वन विभाग के रेंजर ने खंडित ध्वजा फहराकर किया तिरंगे का अपमान

सुमेरपुर कस्बा के वन क्षेत्राधिकारी के कार्यालय में 15 अगस्त को राष्ट्रीय ध्वज का खुलेआम अपमान किया गया। खंडित ध्वज को फहराकर वन क्षेत्राधिकारी ने तिरंगे का घोर अपमान किया। खबर फैलते ही खंडित ध्वज को शाम की बजाय दोपहर बाद ही उतार लिया गया। निर्धारित समय पर सरकारी व गैर सरकारी संस्थाओं में ध्वजरोहण कार्यक्रम सम्पन्न हुये। इसी दौरान सुमेरपुर के वन क्षेत्राधिकारी कार्यालय में रेंजर विषम सिंह ने भी ध्वजारोहण किया।

वन विभाग के रेंजर ने खंडित ध्वजा फहराकर किया तिरंगे का अपमान
खंडित धवजारोहण कर तिरंगे के साथ साथ शहीदों का भी किया घोर अपमान

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जनपद के सुमेरपुर कस्बा के वन क्षेत्राधिकारी के कार्यालय में 15 अगस्त को राष्ट्रीय ध्वज का खुलेआम अपमान किया गया। खंडित ध्वज को फहराकर वन क्षेत्राधिकारी ने तिरंगे का घोर अपमान किया। खबर फैलते ही खंडित ध्वज को शाम की बजाय दोपहर बाद ही उतार लिया गया। निर्धारित समय पर सरकारी व गैर सरकारी संस्थाओं में ध्वजरोहण कार्यक्रम सम्पन्न हुये। इसी दौरान सुमेरपुर के वन क्षेत्राधिकारी कार्यालय में रेंजर विषम सिंह ने भी ध्वजारोहण किया। ध्वजारोहण करते समय रेंजर सहित वहाँ मौजूद कर्मचारियों ने यह भी नही देखा कि जिस तिरंगे को फहरा रहे हैं वह सही है या नहीं है। शायद रेंजर यह भूल गये कि जिस ध्वज को फहराकर आजादी का जश्न मना रहे है वह ध्वज ही खंडित था। ध्वज के बीच में सफेद कपड़े के बीच में जो अशोक चक्र बना होता है यह झण्डे से गायब था। लोगों का कहना है ऐसे पुराने व खंडित ध्वज को फहराना सरासर राष्ट्रीय ध्वज का अपमान है। रेंजर ने जान बूझकर यह जानते हुये कि ध्वज पुराना है और उसमें अशोक चक्र भी गायब हैं फिर भी खंडित ध्वज फहराकर रेंजर ने भारतीय ध्वज आचार संहिता 2002 का राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम 1971 का उल्लंघन किया है। जिसमें सजा का भी प्रावधान हैं। राष्ट्रीय ध्वज हमारी आन बान शान का प्रतीक हैं। आजादी की लड़ाई में बलिदानो का प्रतीक है। न जाने कितने लोगों ने तिरंगे के लिये अपने प्राण न्यौछावर कर दिये इसलिये हर देशवासी तिरंगे का महत्त्व समझता है। लेकिन सुमेरपुर के वन क्षेत्राधिकारी ने 15 अगस्त के दिन खंडित ध्वज का ध्वजारोहण कर इसका घोर अपमान किया है। कस्बे वासियों ने ऐसे गैरजिम्मेदार कार्यवाही की मांग की है।