बिहार तो झांकी है, बंगाल अभी बाकी है...पिता की स्मृति सभा के बाद संसद में दहाड़ीं बांसुरी स्वराज

बिहार तो झांकी है, बंगाल अभी बाकी है...पिता की स्मृति सभा के बाद संसद में दहाड़ीं बांसुरी स्वराज

वंदे मातरम् के मुद्दे पर सोमवार को बीजेपी सांसद बासुरी स्वराज ने खुलकर अपना पक्ष रखा। चर्चा में भाग लेते हुए बांसुरी स्वराज ने अगले साल होने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का हवाला देते हुए कहा कि ‘बिहार तो झांकी हैं, बंगाल अभी बाकी है।’

 

नई दिल्लीः वंदे मातरम् के मुद्दे पर सोमवार को बीजेपी सांसद बासुरी स्वराज ने खुलकर अपना पक्ष रखा। चर्चा में भाग लेते हुए बांसुरी स्वराज ने अगले साल होने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का हवाला देते हुए कहा कि ‘बिहार तो झांकी हैं, बंगाल अभी बाकी है।’ उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में ‘भगवादारी आ रहे हैं।’ उन्होंने कहा, 'बंगाल वंदे मातरम् का जन्मस्थान है, लेकिन आज वह राज्य खतरे में है क्योंकि वहां वंदे मातरम् का गला घोंटा जा रहा है।'

 

पिता की स्मृति सभा के बाद संसद पहुंचीं

बांसुरी स्वराज अपने पिता कौशल स्वराज की स्मृति सभा में बोलने के बाद संसद में बोल रही थीं। पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के पति और बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज के पिता स्वराज कौशल का गुरुवार 4 दिसंबर को निधन हो गया था। बहरहाल, बांसुरी स्वराज ने कहा कि वंदे मातरम् कोई गीत नहीं, भारत के स्वतंत्रता संग्राम की धड़कन है। इसने उन वीरों में साहस जगाया जिन्होंने हमारी सभ्यता और अस्मिता की रक्षा के लिए संघर्ष किया, और आज भी हर भारतीय के हृदय में वही प्रेरणा जागृत करता है।

 

वंदे मातरम्’ के साथ हुआ ‘अन्याय’-राजनाथ सिंह

वहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को कहा कि ‘वंदे मातरम्’ के साथ हुआ ‘अन्याय’ कोई अलग-थलग घटना नहीं, बल्कि ‘तुष्टीकरण की राजनीति’ की शुरुआत थी, जिसे कांग्रेस ने अपनाया था और ‘इसी राजनीति ने देश का विभाजन कराया।’ लोकसभा में वंदे मातरम पर चर्चा में भाग लेते हुए सिंह ने कहा कि यह सच स्वीकार करना पड़ेगा कि वंदे मातरम के साथ जो न्याय होना चाहिए था, वह नहीं हुआ।

राजनाथ सिंह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि आजाद भारत में राष्ट्र गान और राष्ट्रीय गीत को एक समान दर्जा देने की बात थी, लेकिन (राष्ट्रीय गीत) वंदे मातरम् को ‘खंडित’ किया गया। सिंह ने कहा, ‘वह धरती, (बंगाल) जिस पर वंदे मातरम् की रचना हुई, उसी धरती पर कांग्रेस ने इसे खंडित करने का काम किया।’