खांडवप्रस्थ की खंडवारी और बागपत में खेड़ा पलटने का क्या है हजारों साल पुराना रहस्य? इतिहासकार से समझिए
महाभारत काल में खांडवप्रस्थ का नाम आता है जिसे मांगने के लिए श्रीकृष्ण दुर्योधन के पास गए थे। ये उन पांच गांव में शामिल था जो दुर्योधन से पांडवों के लिए मांगे गए थे।
महाभारत काल में खांडवप्रस्थ का नाम आता है जिसे मांगने के लिए श्रीकृष्ण दुर्योधन के पास गए थे। ये उन पांच गांव में शामिल था जो दुर्योधन से पांडवों के लिए मांगे गए थे।
बागपत में खेड़ा पलटने का रहस्य
सचिन त्यागी, बागपत: यूपी के बागपत जिले के सैकड़ों गांव में हजारों साल पुराना वह इतिहास दफन है जिसे जानने के लिए पुरातत्व विभाग समय-समय पर खुदाई करता रहा है। बरनावे का लक्ष्य ग्रह से लेकर सिनोली और तिलवाड़ा साइट हड़प्पा काल से लेकर महाभारत काल के रहस्य को बताती हैं।
बागपत के इतिहासकार अमित राय जैन बताते हैं कि हजारों साल तक इस जिले में प्राकृतिक आपदाएं आती रही होंगी, जिनके कारण अधिकांश गांव में खेड़ा पलटने की भ्रांतियां आज भी लोग बताते हैं। महामारी से लेकर बाढ़ आने तक ऐसे गांव रहे थे जिनके उजड़ जाने के बाद मनुष्य आबादी वहां से चली गई और दूसरी सुरक्षित जगह को अपना लिया। हजारों साल धूल और आंधी के कारण गांव के खंडहर टीलों में तब्दील हो गए जिन्हें लोग आज खेड़ा पलटा कहते हैं।
खांडवप्रस्थ से जुड़ा है नाम
महाभारत काल में खांडवप्रस्थ का नाम आता है जिसे मांगने के लिए श्रीकृष्ण दुर्योधन के पास गए थे। ये उन पांच गांव में शामिल था जो दुर्योधन से पांडवों के लिए मांगे गए थे। खांडवप्रस्थ का जंगल बागपत में खंडवारी के नाम से जाना जाता है जहां के जंगलों में खुदाई होने पर आज भी महाभारत कालीन सभ्यता के पुरातत्व अवशेष मिलते हैं।
बागपत के सैकड़ों गांव में है टीले
बागपत के सैकड़ो गांव में ऐसे टीले मौजूद है जिनका वजूद किसी न किसी गांव के उजड़ने से जुड़ा हुआ है। लोग कहते हैं कि यह टीले खेड़ा पलटने के बाद बन गए जिसके अंदर गांव की सभ्यता दफन हो गई। आज जहां कहीं भी जमीन समतल करने के लिए खुदाई होती है वहीं गांव की सभ्यता निकाल कर आती है और पुरातत्व विभाग को अपनी ओर खींच लेती है।
रहस्य बनी है आपदा
खेड़ा पलटने की सही जानकारी अभी तक नहीं हो पाई है। पुरातत्व विभाग जिले के कई गांवों में खुदाई कर चुका है। वहां से साक्ष्य जुटाए गए हैं, लेकिन हजारों साल पहले ऐसा क्या हुआ कि मानव बस्ती जमीन में दफन हो गई। इसका रहस्य आज भी कोई नहीं जान पाया। कुछ लोग प्राकृतिक आपदा तो कोई महामारी या आक्रमण द्वारा किए गए विनाश को इसका कारण मानते है।
यमुना और कृष्णा नदी के बीच बसे गांव
इतिहासकार अमित राय जैन बताते हैं कि किसी तरह की आपदा रही होगी जिसमें गांव के गांव खाली हो गए। लोग इसे खेड़ा पलटना भी कहते हैं। बागपत जिले के अंदर हड़प्पा काल से लेकर महाभारत और अन्य सभ्यताओं के सबूत मिले हैं। इन्हें समय-समय पर पुरातत्व विभाग की टीम अपने साथ ले गई और आज भी म्यूजियम में उनका सुरक्षित रखा गया है। पुरानी सभ्यता के लोग नदी-नालों के पास अपना रहने का स्थान बनाते थे ताकि पानी की पर्याप्त व्यवस्था उन्हें मिल सके लेकिन बाढ़ और प्राकृतिक आपदाएं उनको झेलनी पड़ती थी।
सिनौली दे चुकी है सबूत
जनवरी 2018 में सनौली में खुदाई शुरू की गई थी। उस वक्त यहां खुदाई में दो रथ, शाही ताबूत, मुकुट, तलवारें, ढाल मिले थे। इससे यह साबित हुआ था कि 2 हजार साल पहले योद्धाओं की लंबी फौज यहां रहा करती होगी।

