उत्तर प्रदेश कानपुर : ताज़ा रिपोर्ट में गंगाजल का पानी पीने योग्य नही, शरीर के लिए घातक रिपोर्ट।

अब कानपुर में पीने लायक नहीं रहा 'गंगाजल', शरीर के लिए हुआ घातक।

उत्तर प्रदेश कानपुर : ताज़ा रिपोर्ट में गंगाजल का पानी पीने योग्य नही, शरीर के लिए घातक रिपोर्ट।

उत्तर प्रदेश कानपुर : उत्तर प्रदेश के कानपुर से गुजर रही पवित्र गंगा की धारा अपवित्र हो चुकी है, गंगा नदी की धारा का पानी इतनी खराब स्थिति में है कि इसे फिल्टर नही किया जा सकता। कई जगहों पर यह पानी आचमन के लायक भी नहीं बचा है, सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की रिपोर्ट में यह हैरान करने वाली बात सामने आई है, गंगा नदी को दूषित करने का सबसे बड़ा कारण इसमें गिरते नालों का जहरीला पानी है। 

केंद्र से लेकर प्रदेश सरकार करोड़ों रुपए खर्च कर गंगा नदी को दूषित होने से बचाने की योजनाएं ला रही है।  नमामि गंगे सहित कई परियोजनाओं पर काम भी चल रहा है, बावजूद इसके कानपुर में गंगा नदी में गिर रहे नालों ने गंगा के जलस्तर को प्रदूषित कर दिया है।  इसका पानी पीने के लिए तो छोडिए यह नहाने के लायक भी नही बचा है। 

रिपोर्ट में आई परेशान करने वाली बात

पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड द्वारा इसी साल की 10 जुलाई, 24 जुलाई और 22 अगस्त को कानपुर में गंगाजल की सैंपलिंग कराई गई थी, जिसकी रिपोर्ट सीपीसीबी की ओर से जारी की गई है। रिपोर्ट में पाया गया कि बिठूर से लेकर फतेहपुर के बीच कई घाटों पर गंगाजल बेहद प्रदूषित हो गया है। सैंपल लेने आई टीम ने मानसून के समय 20 नालों के पास से गंगाजल के सैंपल लिए थे।  इसमें गंगा की सहायक पांडु नदी के दो नालों की सैंपलिंग हुई थी।  पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के जल गुणवत्ता प्रभारी अजीत विद्यार्थी के मुताबिक, गंगा के पानी में पीएच लेवल तेजी से बड़ा हुआ है। कई घाटों पर पीएच लेवल 8 को पार कर गया है, जबकि शुद्ध पानी के लिए पीएच लेवल 7 होना चाहिए, यदि पानी का पीएच लेवल ज्यादा हो जाता है तो यह पानी दूषित हो जाता है। 

नालों के पानी पर नही लग पाई रोक

कानपुर में मंडलायुक्त भी कई बार गंगा घाटों का निरीक्षण कर चुके हैं।  उन्होंने गंगा में गिरने वाले बड़े नाले जैसे सीसामऊ नाला, परमिया नाला, नवाबगंज नाला, म्योरमिल, गुप्तार घाट आदि कई जगहों पर नालों की टाइपिंग कराई जा चुकी है, जिसमें सरकार के करोड़ों रुपए खर्च हुए हैं, कानपुर का सबसे बड़ा शिसामऊ नाले को काफी प्रयासों के बाद गंगा में जाने से रोक दिया गया था। वह भी रिसाव के चलते गंगा नदी में गिर रहा है, लोगों में सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है कि आखिर करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी गंगा में गिर रहे नालों पर अब तक रोक क्यों नहीं लग पाई।