उत्तर प्रदेश लखनऊ : यूपी के किसानों के लिए सरकार नया तोहफ़ा लेकर आ रही है, बीस कृषि उपज उत्पादों को GI टैग कराने की माँग।
यूपी की विशिष्ट कृषि उपज और उससे तैयार उत्पादों की बेहतर मार्केटिंग और अधिकतम लाभ दिलाने के उद्देश्य से योगी सरकार यूपी के 20 कृषि उपज या उससे तैयार उत्पादों की जीआई टैगिंग कराएगी।
उत्तर प्रदेश लखनऊ : उत्तर प्रदेश की विशिष्ट कृषि उपज और उससे तैयार उत्पादों की बेहतर मार्केटिंग और अधिकतम लाभ दिलाने के उद्देश्य से योगी सरकार यूपी के 20 कृषि उपज या उससे तैयार उत्पादों की जीआई टैगिंग कराएगी। इसमें मथुरा का पेड़ा, खुर्जा (बुलन्दशहर) की खुरचन, सीतापुर की मूंगफली, मेरठ की गजक आदि शामिल है।
प्रदेश की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए उसका लाभ उसे तैयार करने वाले काश्तकारों को दिलाने के उद्देश्य से राज्य सरकार और नाबार्ड मिलकर कुल 20 उत्पादों का जीआई टैगिंग (जियोग्राफिकल इंडिकेशन) कराने जा रहा है। इसमें 16 उत्पादों का जीआई रजिस्ट्रेशन राज्य सरकार और चार की नाबार्ड की ओर से कराई जाएगी। अधिक से अधिक काश्तकारों को लाभ पहुंचे इस उद्देश्य से कृषि विपणन विभाग की ओर से प्रदेश के 91 कृषि एवं प्रसंस्कृत कृषि उत्पादों को चिन्हित किया गया, जिनमें से फिलहाल 20 उत्पादों के जीआई पंजियन का निर्णय किया गया है। राज्य सरकार ने इस बारे में शासनादेश जारी कर दिया है।

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क्या है जीआई टैग
वर्ल्ड इंटलैक्चुअल प्रॉपर्टी ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक, जियोग्राफिकल इंडिकेशंस टैग एक प्रकार का लेबल होता है जिसमें किसी प्रोडक्ट को विशेष भौगोलिक पहचान दी जाती है।
इन कृषि अथवा उससे तैयार उत्पादों का जीओ टैगिंग करायेगी राज्य सरकार
जिले का नाम उत्पादों का विवरण
मऊ लौकिहवा भांटा (विशेष प्रकार का बैगन)
मथुरा पेड़ा
बुलंदशहर खुर्जा का खुरचन
सीतापुर मूंगफली
मेरठ ग़जक
लखनऊ रेवड़ी
रामपुर व बाराबंकी मेंथा
कानपुर नगर लाल ज्वार
हाथरस गुलाब जल
बलिया बोरो धान
हरदोई संडीला लड्डू
एटा चिकोरी (कासनी)
फर्रुखाबाद फुलवा आलू
सोनभद्र चिरौंजी
फतेहपुर मलवां पेड़ा
मिर्जापुर/सोनभद्र देशी ज्वार/देशी बाजरा
इन
गोरखपुर पनियाला
क्या है जीआई टैगिंग
वर्ल्ड इंटलैक्चुअल प्रॉपर्टी ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक, जियोग्राफिकल इंडिकेशंस टैग एक प्रकार का लेबल होता है जिसमें किसी प्रोडक्ट को विशेष भौगोलिक पहचान दी जाती है। ऐसा प्रोडक्ट जिसकी विशेषता या फिर प्रतिष्ठा मुख्य रूप से प्राकृति और मानवीय कारकों पर निर्भर करती है। देश में संसद की तरफ से वर्ष 1999 में रजिस्ट्रेशन एंड प्रोटेक्शन एक्ट के तहत ‘जियोग्राफिकल इंडिकेशंस ऑफ गुड्स’ लागू किया गया था। दूसरे शब्दों में कहें तो जीआई टैग दरअसल प्रॉडक्ट से ज्यादा, वो जिस जगह का है, उसकी पहचान होते हैं। जीआई टैग किसी भी क्षेत्र की खास पहचान प्रॉडक्ट को देते हैं और उसे सहेजने के काम आते हैं।

