जीवन की राह पर चलते चलते, करियर की ओर बढ़ते चलते।

जीवन की राह पर चलते चलते,  करियर की ओर बढ़ते चलते।
कविता लेखक सचिन जयसवाल

जीवन की राह पर चलते चलते,

करियर की ओर बढ़ते चलते।

सपनों की उड़ान लेकर हम,

अपनी मंजिल को पास करते चलते।

हर कदम पर चुनौतियों का सामना,

जीवन की लहरों में तैरते चलते।

अस्थायी सफलता के लिए लड़ते हैं,

खुद को नये रंगों में ढालते चलते।

जीवन की दौड़ में जब थक जाते हैं,

खुद को आराम के आगोश में ढालते चलते।

करियर की उचाईयों को छूने के लिए,

हम अपनी मेहनत को जारी रखते चलते।

जीवन की राह पर चलते चलते,

करियर की ओर बढ़ते चलते।

अपने सपनों को पूरा करने के लिए,

हम निरंतर प्रयास करते चलते।

जीवन की चुनौतियों से नहीं डरते,

खुद को नये उचाईयों में ढालते चलते।

करियर की राह पर जब थक जाते हैं,

खुद को आराम के आगोश में ढालते चलते।

जीवन की राह पर चलते चलते,

करियर की ओर बढ़ते चलते।

अपने सपनों को पूरा करने के लिए,

हम निरंतर प्रयास करते चलते।

जीवन की चुनौतियों से नहीं डरते,

खुद को नये उचाईयों में ढालते चलते।

करियर की राह पर जब थक जाते हैं,

खुद को आराम के आगोश में ढालते चलते।