मुम्बई महाराष्ट्र : सहारा ग्रुप के संस्थापक सुब्रत रॉय का 75 वर्ष की आयू में निधन, लम्बे समय से मुम्बई में निजी अस्पताल में चल रहा था इलाज।

सुब्रत रॉय का लंबे समय से मुंबई के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था।

मुम्बई महाराष्ट्र : सहारा ग्रुप के संस्थापक सुब्रत रॉय का 75 वर्ष की आयू में निधन,  लम्बे समय से मुम्बई में निजी अस्पताल में चल रहा था इलाज।

मुम्बई महाराष्ट्र: सहारा समूह के संस्थापक सुब्रत रॉय का 75 वर्ष की आयु में निधन हो गया है।  सुब्रत रॉय का लंबे समय से मुंबई के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था, मंगलवार, 14 नवंबर की रात यहीं उन्होंने आखिरी सांस ली। 

सहारा इंडिया परिवार ने एक बयान में कहा, ''बड़े दुख के साथ सहारा इंडिया परिवार हमारे माननीय 'सहाराश्री' सुब्रत रॉय सहारा के निधन की सूचना दे रहा है। सहाराश्री जी एक प्रेरणादायक नेता और दूरदर्शी थे, मेटास्टैटिक कैंसर, हाइपरटेंशन और डाइबटीज से उत्पन्न जटिलताओं के साथ एक लंबी लड़ाई के बाद कार्डियोरेस्पिरेटरी अरेस्ट के कारण 14 नवंबर 2023 को रात 10.30 बजे उनका निधन हो गया। 

10 जून, 1948 को अररिया, बिहार में जन्मे सुब्रत रॉय का नाम भारत के बड़े बिजनेसमैन में शुमार था।  उन्होंने एक विशाल साम्राज्य की स्थापना की, जो वित्त, रियल एस्टेट, मीडिया और हॉस्पिटलिटी सहित विभिन्न क्षेत्रों तक फैला हुआ था। 

सहारा परिवार ने जारी किया प्रेस रिलीज़। 

वहीं समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने ट्वीट करते हुए कहा कि सहारा श्री सुब्रत रॉय जी का निधन उत्तर प्रदेश और देश के लिए भावात्मक क्षति हैं क्योंकि वो एक अति सफल व्यवसायी के साथ-साथ एक ऐसे अति संवेदनशील विशाल हृदयवाले व्यक्ति भी थे, जिन्होंने अनगिनत लोगों की सहायता की उनका सहारा बने,  भावभीनी श्रद्धांजलि!

बता दें कि सुब्रत रॉय ने गोरखपुर के सरकारी तकनीकी संस्थान से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की शिक्षा ली थी।  फिर 1976 में संघर्षरत चिटफंड कंपनी सहारा फाइनेंस का अधिग्रहण करने से पहले उन्होंने गोरखपुर में व्यवसाय में कदम रखा, 1978 तक, उन्होंने इसे सहारा इंडिया परिवार में बदल दिया, जो आगे चलकर भारत के सबसे बड़े समूहों में से एक बन गया। 

सहारा इंडिया परिवार को एक समय टाइम पत्रिका ने भारतीय रेलवे के बाद भारत में सबसे अधिक नौकरी देने वाला संगठन/समूह बताया था, जिसमें लगभग 1.2 मिलियन लोगों का कार्यबल था।  समूह ने दावा किया कि उसके पास 9 करोड़ से अधिक निवेशक हैं, जो भारतीय परिवारों के एक महत्वपूर्ण हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं।