..तो बिहार चुनाव में मिल जाएगा NDA के पांडव को 'कर्ण' का साथ, मुकेश सहनी ने फंसा रखे हैं कई पेच!
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महागठबंधन और NDA के बीच सीटों के बंटवारे का खेल अभी जारी है। इस बीच, VIP के नेता मुकेश सहनी के नाराज होने की खबरें सामने आई हैं। सूत्रों के अनुसार, सहनी न केवल सीटों की संख्या बल्कि अपनी पसंदीदा सीटों और पदों को लेकर महागठबंधन से नाखुश हैं।
मुकेश सहनी एनडीए में वापसी कर सकते हैं।
पटना: Bihar Vidhansabh Election के चुनावी 'महाभारत' में पांडव का हाथ अब शीघ्र 'कर्ण' थामेंगे? चौंकिए नहीं, बिहार की सियासत में खुद को पांडव (भाजपा, जदयू, हम, लोजपा (आर) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा) कहने वाले रणनीतिकारों को जिस कर्ण यानी VIP के नायक मुकेश सहनी का इंतजार था, वह जल्द ही खत्म होने वाला है। सूत्र बताते हैं कि न केवल सीटों की संख्य नहीं बल्कि जिन सीटों और जिन पदों पर वी आई पी के दावे हैं वह उन्हें महागठबंधन के बड़े दल यानी राजद और कांग्रेस से दूर ही करने जा रहा है। जानिए क्यों महागठबंधन से अलग होने जा रहे है मुकेश सहनी!
तीन कारणों से नाराज हैं मुकेश?
सूत्रों की मिली जानकारी के अनुसार, वीआईपी के नायक Mukesh Sahani तीन कारणों से नाराज चल रहे हैं और कभी भी सब्र का बांध टूट सकता
पहला कारण : बिहार विधान सभा के चुनाव में कम से कम 40 सीटों पर लड़ने की अनिवार्यता पर मुहर लगा दी है। महागठबंधन की तरफ से अधिकतम 15 सीटों का ऑफर दे कर हाथ जोड़ लिया गया
दूसरी वजह: वीआईपी के भागने की दूसरी वजह उनकी पसंदीदा सीटें बन गई है। ऐसी सीटों में मुजफ्फरपुर, पटना साहिब, साहेबगंज और नरकटियागंज जैसी कई सीटें शामिल है। मुजफ्फरपुर विधानसभा से सीटिंग विधायक कांग्रेस के विजेंद्र चौधरी हैं। इसे कांग्रेस छोड़ने वाली नहीं है। साहिबगंज सीट से पिछली बार राजद के रामविचार राय लड़े थे, पर ये सीट वर्ष 2020 के चुनाव में वीआईपी के राजू सिंह ने जीती थी, जो बीजेपी में चले गए है।
पटना साहिब पर वीआईपी की नजर है। गत विधानसभा चुनाव 2020 में पटना साहिब की सीट पर बीजेपी के नंदकिशोर ने जीती थी। राजद के संतोष मेहता ने मात्र दो हजार मतों से यह सीट हारी थी। सूत्र बताते हैं कि यहां से मुकेश सहनी मेयर सीता साहू के बेटे शिशिर कुमार को लड़ना चाहती है।
वीआईपी की नजर नरकटियागंज विधानसभा पर भी है। यहां बीजेपी की रश्मि वर्मा जीती थी। कांग्रेस यहां से दूसरे स्थान पर रही थी। वर्तमान स्थिति यह है कि नरकटियागंज से बीजेपी के सीटिंग विधायक रश्मि वर्मा राजद के टिकट पर नरकटियागंज से चुनाव लड़ना चाहती हैं। नरकटिया से कांग्रेस भी चुनाव लड़ाना चाहता है। गत चुनाव 2020 ने कांग्रेस दूसरे स्थान पर रही थी। इसके अलावा भी कई सीटें हैं जहां पेंच फंसा हुआ है। रही सीटों की संख्या तो वह भी काफी कम हैं। महागठबंधन की तरफ से वी आई पी को चालीस नहीं बल्कि 15 सीटें देने का प्रस्ताव दिया गया। मुकेश सहनी चालीस सीटों के लिए अड़े हैं।
तीसरी वजह: उप मुख्यमंत्री बनने की मांग को भी लेकर मुकेश सहनी को कोई आश्वासन नहीं मिल रहा है। बात यह की जा रही है कि कांग्रेस के विधायकों की संख्या ज्यादा रहेगी तो उप मुख्यमंत्री के पद पर दावा उनका भी होगा। कांग्रेस ने भी लगे हाथ दावा कर दिया है कि उप मुख्यमंत्री दो होंगे- एक दलित और एक मुस्लिम। महागठबंधन से अलग होने का यह भी एक बड़ा कारण मुकेश सहनी के लिए बन गया है।
नाराजगी तो पहले भी जताई थी
जुलाई के अंतिम सप्ताह में नेता प्रतिपक्ष के आवास पर MahaGathbandhan समन्वय समिति की जो बैठक हुई थी उससे किनारा रखा। समन्वय समिति की बैठक को छोड़ वीआईपी नेता मुकेश सहनी दिल्ली चले गए। तब भी यह चर्चा हुई कि वे दिल्ली में गुपचुप तरीके से बीजेपी के शीर्ष नेताओं से मिल रहे थे। तब राजनीतिक गलियारों में मुकेश सहनी के उस वक्तव्य की भी चर्चा होने लगी, जिसमें उन्होंने कहा था कि चुनाव से पहले पीएम नरेंद्र मोदी अगर निषाद जाति को आरक्षण दे दिया, तो वे उनके लिए जान भी दे देंगे।
पलटी मारते रहे हैं सहनी
इतिहास मुकेश सहनी की तुनुकमिजाजी बताता है। वर्ष 2020 के विधासनसभा चुनाव में मुकेश सहनी अचानक भड़क गए थे। मौका था पटना के मौर्या होटल में बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के लिए महागठबंधन में सीट शेयरिंग का ऐलान का। पर जैसे ही उन्हें पता चला कि सीट शेयरिंग के अनुसार कांग्रेस 70, राजद 144 और वाम दल की पार्टियां 29 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। और राजद के कोटे की सीटों में से विकासशील इंसान पार्टी और झारखंड मुक्ति मोर्चा को दिया जाएगा। बस क्या था बीच प्रेस कॉन्फ्रेंस में ही उठे और चल पड़े।
बाद में महागठबंधन से नाता तोड़ लिया और भाजपा की तरफ पग बढ़ा दिया। भाजपा ने उन्हें 11 सीटें दी और उनके चार विधायक जीते। मगर विधानसभा चुनाव 2025 में बीजेपी से नाराज हुए मुकेश सहनी नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के साथ राजनीतिक उड़ान भर रहे हैं।
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