रेयर अर्थ मिनरल्स पर चीन दे रहा दुनिया को टेंशन, कहां से आएगा परमानेंट मैग्नेट, वैकल्पिक स्रोत की तलाश क्यों है मुश्किल
रेयर अर्थ मिनरल्स पर चीन के एकाधिकार ने भारतीय उद्योगों को भी परेशानी में डाला है। अब भारत सरकार इसके वैकल्पिक स्रोतों पर विचार कर रही है, लेकिन यह इतना आसान भी नहीं है।
नई दिल्ली: चीन की ओर से रेयर अर्थ मिनरल्स (दुर्लभ मृदा खनिज) पर अंकुश लगाने के बाद भारत अब स्थायी चुंबक ( permanent magnet) के दूसरे स्रोतों की खोज पर जोर दे रहा है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत इस समस्या को हल करने के लिए काम कर रहा है। वैसे भारत जिस दिशा में सोच रहा है, वह नामुमकिन नहीं है, लेकिन बहुत ही चुनौतीपूर्ण और खर्चीला माना जाता है। हालांकि, भारत चीन की पैंतरेबाजी की वजह से जिस उलझन में फंसा है, उससे पूरी दुनिया जूझ रही है। लेकिन, अगर भारत सरकार ने विकल्प तलाशने की बात कही है तो उसकी चिंता और जरूरतों को खारिज भी नहीं किया जा सकता। इसलिए इसके हर पहलुओं पर गौर करना जरूरी है।
दुर्लभ मृदा खनिजों पर चीन के एकाधिकार से टेंशन में दुनिया
ET की एक रिपोर्ट के अनुसार Piyush Goyal ने स्विट्जरलैंड के बर्न में कहा कि भारत, चीन से दुर्लभ मृदा खनिजों (rare earth minerals) से बने स्थायी चुंबकों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बातचीत कर रहा है। साथ ही भारत इन महत्वपूर्ण पृथ्वी तत्वों के लिए 'वैकल्पिक स्रोतों' पर भी काम कर रहा है। सरकार भारतीय उद्योगों के साथ लगातार संपर्क में है, ताकि स्थानीय स्रोतों को जल्दी से विकसित किया जा सके। ऐसी हालत इसलिए हो गई है, क्योंकि दुर्लभ पृथ्वी चुंबकों की आपूर्ति का 90% चीन के नियंत्रण में है। अमेरिका के साथ ट्रेड वार के चक्कर ने चीन ने इनकी आपूर्ति पर कुछ रोक लगाई है, जिससे इसकी सप्लाई चेन बिगड़ गई है। गोयल ने कहा, 'एक तरह से, यह उन सभी के लिए एक चेतावनी है, जो कुछ जगहों पर बहुत अधिक निर्भर हो गए हैं। यह पूरी दुनिया के लिए एक चेतावनी है कि आपको अपनी आपूर्ति श्रृंखला में भरोसेमंद भागीदारों की जरूरत है।'
अपनी शर्तों पर रेयर अर्थ मिनरल्स सप्लाई करना चाहता है चीन
असल में चीन की ओर से Raer Earth Minerals की सप्लाई चेन बाधित होने की वजह से उद्योग जगत में हाहाकार की स्थिति पैदा होने लगी है। ऑटो उद्योग और बाकी उद्योग संगठनों की ओर से इसी वजह से सरकार से इस मामले जल्द से जल्द समाधान की मांग की जा रही है। चीन ने अप्रैल में सात दुर्लभ पृथ्वी तत्वों और उनसे जुड़े चुंबकों के लिए विशेष निर्यात लाइसेंस जरूरी कर दिया था। चीन यह चाहता है कि वह जो स्थायी चुंबक सप्लाई करेगा, यह सुनिश्चित हो जाय कि उसे वहां से अमेरिका को निर्यात नहीं किया जाए। यही नहीं, चीन चाहता उनका इस्तेमाल रक्षा उद्योगों में भी नहीं किया जाए।
भारत रेयर अर्थ मिनरल्स के विकल्प पर कर रहा विचार
यही वजह है कि भारत सरकार चीन के साथ कूटनीतिक स्तर पर तो रेयर अर्थ मिनरल्स की सप्लाई चेन दुरुस्त करने के लिए बात कर ही रहा है, इंडियन रेयर अर्थ्स लिमिटेड से घरेलू संसाधनों के विकास में तेजी लाने के लिए भी कह रही है। वैकल्पिक स्रोतों पर मंत्री ने कहा कि ये कुछ ऐसी तकनीकें भी हो सकती हैं, जिन्हें भारत विकसित कर रहा है। उन्होंने कहा, 'सरकार, उद्योग और स्टार्टअप और इनोवेटर्स सभी एक टीम के रूप में काम कर रहे हैं और हमें विश्वास है कि छोटी अवधि में कोई समस्या हो सकती है, लेकिन हम मध्यम से लंबी अवधि में विजेता बनकर उभरेंगे।'
रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REEs-दुर्लभ पृथ्वी तत्व ) क्या हैं?
रेयर अर्थ मिनरल्स दरअसल, कुल 17 तत्वों का एक पूरा समूह है। इसमें 15 लैंथेनाइड श्रृंखला के तत्व शामिल होते हैं। इनमें लैंथेनम, सेरियम, नियोडीमियम, प्रोमेथियम,प्रासियोडीमियम, समैरियम, यूरोपियम, टर्बियम, डिस्प्रोसियम, होल्मियम, एर्बियम, थुलियम, येटरबियम,गैडोलिनियम और ल्यूटेटियम जैसे तत्व शामिल हैं। इनके अलावा स्कैंडियम और येट्रियम भी दुर्लभ मृदा खनिजों में शामिल हैं।
दुर्लभ पृथ्वी तत्वों की खदानें दुनिया में कहां है?
सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि दुर्लभ पृथ्वी तत्वों की खदानें दुनिया में कुछ ही जगहों पर हैं। इनमें चीन, वियतनाम, ब्राजील और रूस को लिया जा सकता है। इसकी सप्लाई चेन और व्यापार हमेशा से एक जटिल व्यवस्था का हिस्सा है, जिससे कई बार पहले भी दिक्कतें आ चुकी हैं। दुर्लभ पृथ्वी तत्व में कुछ खास गुण होते हैं। ये बिजली, चुंबक, भौतिक और रासायनिक गुणों में अन्य पृथ्वी तत्वों से बहुत अलग होते हैं। इन्हीं की वजह से ये सुपर मैग्नेट, लेजर तकनीक और रासायनिक संश्लेषण के लिए उत्प्रेरक जैसे जरूरी उपकरण के काम आ पाते हैं।
दुर्लभ पृथ्वी तत्वों के वैकल्पिक स्रोत क्या हैं?
रेयर अर्थ एलिमेंट्स के अब कुछ विकल्प भी मौजूद हैं, लेकिन यह बहुत ही सीमित हैं, जो बिना इसके मूल प्रभाव को कम किए उनकी जगह ले सकते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार मूलरूप से इनके चार विकल्प हो सकते हैं, जो रेयर अर्थ एलिमेंट्स की जगह ले सकते हैं। ये हैं:-
1. उल्कापिंड चुंबक (Meteorite Magnets): उल्कापिंडों से प्राप्त चुंबक।
2. आयरन-नाइट्राइड सुपर मैग्नेट (Iron-Nitride Super Magnets): लोहे और नाइट्रोजन से बने शक्तिशाली चुंबक।
3. बॉक्साइट अवशेष : (Bauxite Residue REE Reclamation): दुर्लभ पृथ्वी तत्वों के बॉक्साइट अवशेष से फिर से प्राप्त करके तैयार करना।
4. REE-फ्री डिजाइन (REE-Free Design): ऐसे प्रोडक्ट का विकास,जिनमें दुर्लभ पृथ्वी तत्वों की जरूरत ही न हो।
इन विकल्पों पर काम करके रेयर अर्थ एलिमेंट्स पर निर्भरता कम की जा सकती है।

