जानिए किस अंग्रेज ने बनाई थी आईपीसी की धाराएं, प्रेस की स्वतंत्रता के लिए किया था पहला समर्थन...
जानिए किस अंग्रेज ने बनाई थी आईपीसी की धाराएं, प्रेस की स्वतंत्रता के लिए किया था पहला समर्थन...
लखनऊ : देश में एक समय में राजशाही हुकूमत चला करती थी जिसमें राजाओं महाराजाओं के द्वारा बनाए गए नियम कायदे कानून लागू हुआ करते थे राजा बदल जाने के बाद नियम कानून भी बदल जाते थे, हमारे आपराधिक कानूनों का इतिहास 1860 के दशक का है जब भारत में ब्रिटिश अंग्रेजों का शासन था गुलाम भारत में आपराधिक कानूनों को लाने वाले शख्स का नाम थॉमस बबिंगटन मैकाले था, इतिहासकारों ने मैकाले का वर्णन इंग्लिश राजनेता, निबंधकार, कवि और इतिहासकार के तौर पर किया है उनका जन्म साल 1800 में इंग्लैंड के लीसेस्टरशायर में हुआ था, अंग्रेजों द्वारा भारत को गुलाम बना लेने के बाद उन्होंने भी अपने नियम कायदे कानून बनाने शुरू कर दिए थे जिसके बाद अंग्रेज अधिकारियों हुक्मरानों द्वारा इस क्षेत्र में अलग से कार्य किया गया जिसको विधि के रूप में चलायमान रखने के लिए पैनल की रचना कराई गई इसी बीच वर्ष 1834 में विधि आयोग के अध्यक्ष के रूप में थॉमस बबिंगटन मैकाले ने एक दंड संहिता का मसौदा तैयार किया जो बाद में भारतीय आपराधिक कानून का आधार बन गया जिसे बाद में आईपीसी का नाम दिया गया, नीलगिरि डॉक्यूमेंटेशन सेंटर से प्राप्त दस्तावेजों से पता चलता है कि मैकाले के नीलगिरि का प्रवास किया था मैकाले ने 1834 में तत्कालीन मद्रास से सात दिनों के लिए पालकी पर यात्रा की और ऊटी में तीन महीने बिताए थे मैकाले ने भारत में भ्रमण करके स्थानीय जरूरतों के हिसाब से पैलन की धाराओं का विस्तार किया, मैकाले ने भारत में गवर्नर जनरल की परिषद के कानून सदस्य के रूप में काम शुरू किया था जिन्होंने प्रेस की स्वतंत्रता और कलकत्ता में सीधे सर्वोच्च न्यायालय में अपील करके ब्रिटिश निवासियों द्वारा प्राप्त विशेषाधिकार को हटाने का समर्थन किया ।
जुल्म के खिलाफ आवाज समय-समय पर उड़ती रही है कभी इस आवाज ने सियासत को पलटा और कभी अत्याचार के खिलाफ उठती यह आवाज सियासत के द्वारा दफना दी गई। कहते हैं जुल्म करना तो गुनाह है ही मगर जुल्म को सहना भी गुनाह है। इसलिए जुल्म के खिलाफ आवाज हमेशा बुलंद करनी चाहिए।
(2)बेहतर दिनों की आस में ग़रीब जुल्म सहता गया
अत्याचार के खिलाफ आवाज़ उठाने की बजाय
वैसे करता रहा जैसे अमीर कहता गया
रोटी कमाने से फुर्सत मिले तो आवाज़ उठाए
भूखे पेट जुल्म के खिलाफ आवाज़ निकलेगी कैसे
अत्याचार के खिलाफ शायरी
एक हो जाओ अत्याचार के खिलाफ
जुल्म और भ्रष्टाचार के खिलाफ
जो करती है शोषण गरीबों का