उत्तर प्रदेश: प्रतापगढ़ जिया-उल-हक हत्याकांड में रघुराज प्रताप सिंह की भूमिका की जांच करेगी CBI।

Uttar Pradesh Pratapgarh

उत्तर प्रदेश: प्रतापगढ़ जिया-उल-हक हत्याकांड में रघुराज प्रताप सिंह की भूमिका की जांच करेगी CBI।

उत्तर प्रदेश: प्रतापगढ़ जिले में दस साल पहले तत्कालीन डीएसपी जिया-उल-हक की हत्या में कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की भूमिका की जांच का सीबीआई को आदेश सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने दिया। 

जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस बेला माधुर्य त्रिवेदी की इस पीठ ने मारे गए डीएसपी की पत्नी परवीन आजाद की ओर से दायर याचिका प फैसला देते हुए पिछले साल इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा क्लोजर रिपोर्ट को मान्यता देने वाले आदेश को रद्द कर दिया था। 

               DSP जियाउल हक़ 

हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी, ट्रायल कोर्ट ने राजा भैया और उनके चार साथियों के खिलाफ बीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करते हुए जांच जारी रखने का आदेश दिया था। 

गौरतलब है कि प्रतापगढ़ के कुंडा के पुलिस क्षेत्राधिकारी रहे जिया उल हक की वर्ष 2013 में ड्यूटी के दौरान हत्या कर दी गई थी। 

कैसे हुई थी जिया-उल-हक की हत्या। 

2 मार्च 2013 की शाम प्रतापगढ़ के हथिगवां थाना क्षेत्र के बलीपुर गांव में तत्कालीन प्रधान नन्हे यादव की उस वक्त हत्या कर दी गई, जब बलीपुर गांव में एक विवादित जमीन का मसला सुलझाने के लिए वह कामता पाल के घर पहुंचे थे। बाइक से आए बदमाश प्रधान नन्हे यादव को गोली मारकर फरार हो गए थे, प्रधान की हत्या की खबर उनके समर्थकों को मिली तो उन लोगों ने कामता पाल के घर में आग लगा दी। 

घायल नन्हे यादव को इलाज के लिए अस्पताल भी ले जाया गया था, हालांकि, उनकी मौत हो गई थी। लोगों में बढ़ते आक्रोश और हुजूम के बीच नन्हे यादव का शव बिना पोस्टमॉर्टम के ही गांव पहुंच गया। 

मामला हत्या का था, ऐसे में बिना पोस्टमॉर्टम के शव गांव पहुंचने की खबर तत्कालीन सीओ जियाउल हक को मिली तो वह अपने लाव लश्कर के साथ गांव वालों से बात करने पहुंच गए, लेकिन गांव में हिंसा शुरू हो गई, पथराव शुरू हो गया, कुंडा कोतवाल सर्वेश मिश्रा के साथ सीओ जियाउल हक जैसे ही गांव में पहुंचे तो गली में गांव वालों ने पुलिस पर हमला बोल दिया। 

इसी अफरा-तफरी में हुई फायरिंग में नन्हे यादव के भाई सुरेश यादव की भी गोली लगने से मौत हो गई, इधर गांव वालों के हमला बोलते ही पुलिस वाले भाग गए और जियाउल हक गुस्साए गांव वालों की भीड़ का शिकार हो गए। 

बलीपुर गांव में हुए इस हत्याकांड में कुल 4 एफआईआर दर्ज करवाई गईं। जिसमें एक एफआईआर नन्हे यादव हत्याकांड की, दूसरी एफआईआर पुलिस पार्टी पर हमले की, तीसरी एफआईआर सुरेश यादव की हत्या की और चौथी एफआईआर में सीओ जियाउल हक की हत्या की, मामले में तत्कालीन एसओ मनोज शुक्ला के तरफ से नन्हें यादव के भाइयों, बेटे समेत 10 लोगों को नामजद किया गया। 

पत्नी ने दर्ज कराई थी एफआईआर। 

इस मामले में सीओ जियाउल हक की पत्नी परवीन आजाद ने भी हत्या की तहरीर दी, पत्नी परवीन आजाद की तरफ से दर्ज करवाई गई। 

एफआईआर में कुल 5 लोगों को नामजद किया। जिसमें तत्कालीन नगर पंचायत अध्यक्ष गुलशन यादव, राजा भैया (रघुराज प्रताप सिंह) के प्रतिनिधि हरिओम श्रीवास्तव, रोहित सिंह, राजा भैया के ड्राइवर रहे संजय सिंह उर्फ गुड्डू और खुद राजा भैया नामजद किए गए। 

जिस वक्त प्रतापगढ़ में सीओ जियाउल हक की हत्या हुई, उस वक्त राजा भैया विधानसभा सत्र के चलते लखनऊ में मौजूद बताए गए।