भारत अब पाकिस्तान के परमाणु बम से नहीं रूकेगा... पाकिस्तानी थिंक टैंक में दिखा दिल्ली की नई डॉक्ट्रिन का खौफ, क्या कहा?
CISS ने यह भी तर्क दिया कि भारत के सैन्य आधुनिकीकरण के लिए पश्चिमी समर्थन, इस दोषपूर्ण धारणा पर आधारित है कि नई दिल्ली मुख्य रूप से चीन के प्रतिकार के रूप में काम करेगी। थिंक टैंक ने तर्क दिया कि भारत की बढ़ी हुई क्षमताएं काफी हद तक पाकिस्तान की ओर डायरेक्टेड हैं।
मई संघर्ष में भारत ने किया था पाकिस्तान के 9 एयरबेस पर हमला
इस्लामाबाद: आतंकवाद पर भारत की नई डॉक्ट्रिन से पड़ोसी देश में दहशत का माहौल है। इस्लामाबाद के एक थिंक टैंक CISS ने रविवार को चेतावनी दी है, कि भारत का "न्यू नॉर्मल" मिलिट्री सिद्धांत न्यूक्लियर हथियारों से लैस साउथ एशिया में अस्थिरता पैदा करने वाली ताकत है। इसने कहा है कि नई दिल्ली के इस रवैये से भविष्य में किसी भी संकट में गंभीर तनाव बढ़ने का खतरा है। रिसर्च इंस्टीट्यूट ने एक मीडिया बयान में कहा कि सेंटर फॉर इंटरनेशनल स्ट्रैटेजिक स्टडीज (CISS) का यह आकलन, ऑस्ट्रेलियाई जानकारों और अधिकारियों के साथ बातचीत के दौरान आया।
डॉन के मुताबिक, CISS ने तर्क दिया है कि भारत का "न्यू नॉर्मल" का मकसद आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई की आड़ में पाकिस्तान के खिलाफ एकतरफा मिलिट्री हमलों को सही ठहराना है। थिंक टैंक ने कहा कि सुरक्षा सिद्धांत, जो 2019 से भारत की नीति का केंद्र रहा है और इस साल फिर से लागू किया गया है, वो कथित सीमा पार हमलों के लिए ऑपरेशन सिंदूर जैसे पारंपरिक सैन्य जवाबों की ओर बदलाव का संकेत देता है। और संकेत देती है कि भारत, भविष्य के संघर्षों में पाकिस्तान के परमाणु प्रतिरोध को ध्यान में रखे बिना कार्रवाई कर सकता है।
भारत की नई डॉक्ट्रिन से पाकिस्तान में खौफ
CISS ने अपने आकलन में कहा है कि भारत के इस रवैये से पता चलता है, कि भारत पाकिस्तान के न्यूक्लियर डिटरेंट से नहीं रुकेगा। और यह एक ऐसा रुख है जो सीधे तौर पर इस इलाके के लंबे समय से चले आ रहे न्यूक्लियर बैलेंस को चुनौती देता है। CISS ने कहा, "परमाणु हथियार रखने वाले देश में पक्की मिलिट्री जवाबी कार्रवाई को इंस्टीट्यूशनल बनाना, असल में अस्थिरता पैदा करने वाला है।" थिंक टैंक ने तर्क दिया कि लिमिटेड वॉर स्ट्रेटेजी के लिए अपने पारंपरिक मिलिट्री फायदे का फायदा उठाकर, नई दिल्ली गलत कैलकुलेशन का खतरा बढ़ा रहा है।
CISS ने यह भी तर्क दिया कि भारत के सैन्य आधुनिकीकरण के लिए पश्चिमी समर्थन, इस दोषपूर्ण धारणा पर आधारित है कि नई दिल्ली मुख्य रूप से चीन के प्रतिकार के रूप में काम करेगा। थिंक टैंक ने तर्क दिया कि भारत की बढ़ी हुई क्षमताएं काफी हद तक पाकिस्तान की ओर डायरेक्टेड हैं। यानि, CISS ने यह तर्क देने की कोशिश की, कि पश्चिमी देश चीन के मुकाबले खड़ा करने के लिए भारत को सैन्य सहायता देते हैं, जबकि भारत उनका इस्तेमाल पाकिस्तान को ध्यान में रखकर करता है।

